zakhmi dil shayari | जख्मी दिल शायरी

Pooja
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zakhmi dil shayari | जख्मी दिल शायरी

अजीब शर्त रख दी दिलरुबा ने मिलने की...
सूखे पत्तों पर चल कर आना और आवाज़ भी न हो..
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हमारे बिन अधूरे तुम रहोगे,
कभी चाहा किसी ने खुद तुम कहोगे,
हम ना होंगे तो ये आलम ना होगा,
मिलेंगे बहुत से पर हम सा कोई पागल ना होगा।
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रूठ जाने के बाद गलती किसी की भी हो....
बात शुरू वहीं करता हैं, जो बेपनाह मोहब्बत करता हैं!!
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हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
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कोई तेरे साथ नहीं,,,तो भी गम ना कर,,,
खुद से बढ़कर दुनियां में, कोई हमसफर नहीं होता.
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कर्ज़ होता तो उतार भी देते...
कमबख़्त "इश्क़" था... चढ़ता रहा...
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ना पा सकूं , ना भुला सकूं ...
तु मेरी मजबूरी - सा हैं ;
तेरे बिना जी रहे हैं और जी भी लेंगे ,
फिर भी तु जरूरी - सा हैं
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इश्क़ खुदकुशी का धंधा है, 
अपनी ही लाश अपना ही कंधा है...
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एकतर्फी मोहब्बत मे खुश थे हम
आपने हमारा हाल पूछकर गलती कर दी 
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चलो फ़िर से हौले से मुस्कुराते हैं,
बिना माचिस के ही लोगों को जलाते हैं ।
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सब जान के अनजान बन रहा हू मै,
कुछ इस तरह इस दिल पर मेहरबान हो रहा हु में।
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तुमने मोहब्बत देखी है वफा नहीँ देखी,
पिँजरे खोल भी दो तो कुछ पंछी उड़ा नहीँ करते.!!
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सियासतों की तरह है मुहब्बतों का मिज़ाज़..........
जिसे भी सौंपी हुकूमत उसी ने लूट लिया.....!!
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आँख बंद करके चलाना खंजर मुझ पे..
कही मैं मुस्कुराया तो तुम पहले मर जाओगे.....
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सादगी मशहूर है हमारी, खुशमिजाजी भी कमाल है।
हम शरारती भी इंतेहा के है, तनहा भी बेमिसाल है।।
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मेरी आँखो ने पकड़ा है, उन्हे कई बार रंगे हाथ.. 
वो इश्क करना तो चाहते है , मगर घबराते बहुत है..
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दिल की खामोशी से सांसो के ठहर जाने तक,
मुझे याद रहेगा वो अजनबी मेरे मर जाने तक।
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हम बेक़सूर लोग भी बड़े दिलचस्प होते हैं...
शर्मिंदा हो जाते हैं ख़ता के बग़ैर भी..
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अगर मैं कह भी दू की चले जाओ,
तुम मेरी बातों का ऐतबार मत करना....!
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चुरा लो हसीन लम्हों को उम्र से,
जिम्मेदारीयाँ मोहलत कब देती है।
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उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, 
मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
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रवैया बहुत खराब है अभी मेरे हालातों का.....
लोग बहुत जल्दी बुरा मान जाते हैं मेरी बातों का...
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उसकी आँखों में अब हया चश्मे नहीं है
अब उसकी बातों में लजाकत नहीं है
अरे तुमने मोहब्बत कैसे कर लिया उससे
ये जानते हुए कि वो मोहब्बत केे क़ाबिल नहीं है
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न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, 
हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं। 
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माना की खुद चलकर आए है हम तेरे दर पर ए मोहब्बत
लेकिन दर्द, दर्द और सिर्फ दर्द ये कहाँ की मेहमान नवाजी है
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एक सपने की तरह सजा कर रखु
अपने इस दिल में हमेशा छुपा कर रखु
मेरी तक़दीर मेरे साथ नहीं वर्ना
ज़िंदगी भर के लिए उसे अपना बना कर रखु..
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पहले मुफ्त में लुटाकर इसकी आदत लगाई जाती हैं...
इश्क हो या नशा.. बाद में दोनों की कीमत चुकाई जाती हैं...
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लबों तक आकर भी जुबां पर न आए...
मोहब्बत में सब्र का वो मुकाम हो तुम...
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मैं सुरज के साथ रहकर भी भूला नहीं अदब,
लोग जुगनू का साथ पाकर मगरुर हो गये।
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जब ख़ामोश आँखों से बात होती है, 
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है, 
तुम्हारे ही ख्यालों में खोये रहते हैं, 
पता नहीं कब दिन और कब रात होती है।
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मुझे पहले लगता था, जाति मसला है,,,
मैं फिर समझ गया इश्क़ कायनाती मसला है....
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तुम बेवफाई करो हम फिर भी वफा करेंगे
दाग दो खंजर चाहे सीने मैं हम उफ्फ तक ना करेंगे
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यारियाँ ही रह जाती है मुनाफ़ा बनके ।
मोहब्बत के सौदों में नुक़सान बहोत हैं ।।
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जला के मेरे दिलं को
देखो तो ओ कैसे खुश हो रहा
देख के उनकी खुशी
Hayye मेरा तुटा दिलं कितना झूम रहा
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अल्फाज तो जमाने के लिये हैं, तुम आना,
तुम्हें हम दिल की धडकनें सुनायेंगे!
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धीरे से लबों पे पिघला है यह सवाल....
तू ज़्यादा ख़ूबसूरत है या तेरा ख़्याल.......!!!
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बस इतना चाहिए तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
की जमीं पे बैठु तो लोग उसे बड़प्पन कहे, औकात नहीं।
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इँतजार करते करते एक और रात बीत जायेगी,
पता हैं तुम नहीं आओगे और ये तनहाई जीत जायेगी...।।
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