zindagi alone shayari | ज़िंदगी अलोन शायरी

Pooja
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zindagi alone shayari | ज़िंदगी अलोन शायरी

शायद कुछ क़र्ज़ चुकाना 
बाक़ी रह गया होगा मेरे हिस्से का ...
वरना आज मेरी ख्वाहिशें अधूरी ना होती
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नशा उसे सिर्फ चाय का है, 
कह दो शराब से अपनी औकात में रहे।
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लोग सीने में क़ैद रखते हैं ,
हम ने  सिर पर चढ़ा लिया दिल को ..
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मैं तुझ से साथ भी तो उम्र भर का चाहता था
सो अब तुझ से गिला भी उम्र भर का हो गया है
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कुछ देर बैठी रही पास, और फिर उठ कर चली गई
गुरुर तो देखो तन्हाई का ये भी बेवफ़ा हो कर चली गई
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शिकायत और दुआ मे जब एक ही शख़्स हो
तो समझ लो इश्क़ करने की अदा आ गयी तुम्हें..
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न नाप पाता कोई चाँद की खूबसूरती को कभी,
उस खुदा ने तुझे बना चाँद को भी नीचा दिखा दिया एक रोज।
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उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं, 
तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं,
झूठ कहूँ तो सब कुछ है मेरे पास, 
और सच कहूँ तो तेरे सिवा कुछ नहीं।
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तेरी मुस्कान तेरा लहज़ा और तेरे मासूम से अल्फाज़, 
और क्या कहूँ बस बहुत याद आते हो तुम.
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रोज लिखते है तेरे बारे में,
देख कितने बेवफा हो गए है हम
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आखि़र कर ही दिया उसने भी इज़हार-ए-मोहब्बत 
जो कभी हमको इस बला से दूर रहने को कहते थे।
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आदत और चाहत भी कमाल की है।
किसी की हो जाए तो दिल को राहत नही होती।
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रात जो आयी है.. ये तो गुजर जानी है...
ऐ दिल अब तू यह सोच के तुझे नींद कैसे आनी है...
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बिखर गया हूँ, और कई सवाल है, 
तब भी साथ हो, ये भी तो कमाल है...
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कद्र करने का मेरा सलीका थोड़ा अटपटा सा लगता हैं
मैं करू जिस किसी से बात वो मुझें अपना सा लगता हैं
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तड़प रहा हूँ, अंतिम मान के, 
पूरी मेरी ख्वाहिश कर दो,
विरह की अग्नि में जल रहा हूँ, 
आकर मिलन कि बारिश कर दो।
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जो लोग अंदर से बिखर जाते है...
अक्सर वही लोग 
दूसरों को जीना सिखाते हैं..
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नींदे गुमशुदा और वक़्त फरार 
तुम्हारा इंतजार और हसरतें बेशुमार....
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मधुशाला में गिरता तो खुद ही उठ जाता,   
मोहब्बत में गिरा हूँ अब तो ईश्वर ही उठाएगा...!
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इतने बदनाम हुए हम जमाने में, 
लगेंगी आपको सदियों हमे भुलाने में
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खुशबुओं को भी महकने का बहुत शौक है
मगर ये मुमकिन नहीं हवाओं से रिश्ता किये बगैर।
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खा रहा इंसान इंसान को नोच कर
कमाल तो देख,
परेशॉ भी है इंसान इंसान को सोच कर।।
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वक़्त का सितम तो देखिए, 
खुद गुज़र जाता है हमे वही छोड़ कर .... 
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काश लिख सकता वो यादें तेरी जो ख्वाब थे पुराने
फिर सोचता हु की कही वो अरमान न जाग उठे 
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अजीब रात थी कल तुम भी आ के लौट गए
जब आ गए थे तो पल भर ठहर गए होते
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आँखो की बारिश यू भिगो देती है जैसे 
सालो से हमने कभी बारिश ही ना देखी हो,
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एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक 
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा
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तलब की राह में पाने से पहले खोना पडता है
बडे सौदे नजर में हों तो छोटा होना पडता है
मोहब्बत जिन्दगी के फैसलों से लड़ नही सकती
किसी को खोना पडता है किसी का होना पडता है।
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किसी शायर से कभी उसकी उदासी की वजह पूछना
दर्द को इतनी ख़ुशी से सुनाएगा की प्यार हो जायेगा ।
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यह तो सोचा तुमने की तुम्हारे पीछे पड़े थे हम पर,
ये नहीं जाना की खुद से आगे माना हुआ था तुम्हें...
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छोड़कर तुझको हम तेरी सौत से दोस्ती कर ले...... 
इतना ना घुमा जिन्दगी की मौत से दोस्ती कर ले....
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