sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

"पंखो की ज़रूरत पंछियों को है

तुम बस हौंसला बनाए रखना"....

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दास्तां सुनाऊं, और मज़ाक बन जाऊं।

बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश हो जाऊं।।

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फिर उसके बाद मैंने कुछ नहीं खोया...

वो मेरी जिन्दगी का 'आख़िरी नुकसान' था...

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मेरे साँसों की हर दुआओं मे शामिल तुम रहोगी, 

इससे बढ़कर इश्क की इबादत क्या होगी..!!

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sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

"दिल बहलाने वाले को नही, 

दिल जीतने वाले को जादूगर कहते हैं।"

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तुम पर कोई हक़ नहीं है मेरा,

बस अज़ीज़ हो तुम !

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सवरने का सवाल ही पैदा नहीं होता;

 हम बिखरे ही इतने लाजवाब है...!!

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बेवजह ही हो जाता है प्यार,

वजह तो बिछड़ने की होती है.

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sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

रात के दरिया का किनारा भी कभी आएगा

वक्त का क्या है दोस्त, हमारा भी कभी आएगा

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एक ही करवट पर गुजारी दी सारी रात, 

दूसरी करवट पे तेरा ख्वाब जो सोया था..!

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किन लफज़ों मे लिखूँ मैं अपने इंतज़ार को ,

बेजुबां सा इश्क ….खमोशी से ढूँढता है तुम्हे..♥️♥️

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तुम्हें भी कहाँ आया मनाने का हुनर,

तुम मिलने भी आई तो बाल बाँध कर..!!

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sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

उजालो में मिल ही जायेगा.. कोई ना कोई,

तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे..!!


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उसको ठीक से आइना दिखा आए

हम अपने हिस्से की दोस्ती निभा आए

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बड़ी मुश्किल से अच्छे दोस्त मिलते हैं ज़माने में

तुम अपने दोस्तों को वक़्त पे इनकार मत करना

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देख लूँ पत्थरों का भी मैं हौसला

आइने सी संवर लूँ ठहर तो ज़रा

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sad ghazal shayari | सेड गजल शायरी

हवा में ताश का महल नहीं बनता, 

रोने से बिगड़ा मुकद्दर नहीं बनता। 

दुनिया जीतने का हौसला रख ऐ दोस्त, 

एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता॥

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अगर आपकी अंतरात्मा और आपकी नीयत साफ है

तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई आपको अच्छा कहे या बुरा

आप अपनी नियत से पहचाने जाओगे दूसरों की सोच से नहीं...

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यह जरूरी नहीं है कि हर प्रश्न का 
उत्तर शब्दो से दिया जाए
कभी-कभी कुछ प्रश्नों के उत्तर अपने 
कर्मों से ही दिया जाना श्रेष्ठ विकल्प होता है!!

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बहुत चाहा मगर जज़्बात की आँधी नहीं रुकती!

हमारे दिल पे जो चलती है वो आरी नहीं रूकती

तुम्हारे बिन हमारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं

कभी हिचकी नहीं रूकती कभी सिसकी नहीं रूकती !

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वो जिसपर उसकी रहमत हो वो दौलत मांगता है क्या

मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत मांगते है क्या

तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना

कभी उगता हुआ सूरज इज़ाज़त मांगता है क्या

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सागरतल तक कितने पहुँचे?

कितनों ने नापा पर्वत को ?

कितने देख रहे थे बादल

पर कुछ ही पढ़ पाये ख़त को !

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दर्द पासे के जैसा पलट जाएगा

छोड़ कर जाएगा फिर लिपट जाएगा

प्यार गर घट गया वक़्त के साथ तो

दर्द भी वक़्त के साथ घट जाएगा !

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तमन्ना की इकाई अगर दहाई में बदल जाएँ,

पहाड़े सा मेरा जीवन रूबाई में बदल जाएँ,

तुम अपने अंक में ले लो तो मेरा शून्य सा जीवन

सफलता की किसी स्वर्णिम इकाई में बदल जाएँ।

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साँस के गीत को साँस गुन ले अगर

आँख की सीप से अश्रु चुन ले अगर

प्रेम का पूर्ण संवाद हो जाएगा

मौन ने जो कहा मौन सुन ले अगर !

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तुम्हारी ज़िन्दगी में प्यार का सैलाब हो जाते

तुम्हारे मन के पतझड़ में भी हम शादाब हो जाते

हमारा बस नहीं चलता,अगर चलता तो ये करते

तुम्हारी नींद में घुलकर तुम्हारा ख़्वाब हो जाते

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कई बार दिल के स्लेट पर मेरे आंसुओ ने गजल लिखी

वो करीब मेरे रहा मगर कभी उसने मुझे पढ़ा ही नहीं।

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वक़्त को दरकिनार करती हूँ

ख़ुद पे मैं ऐतबार करती हूँ

जो मेरा इंतज़ार करता था

उसका मैं इंतज़ार करती हूँ !

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ख़्वाब से भर लिया आँख को इस क़दर

अब किसी कोर में नीर टिकता नहीं !

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देह से आत्मा तक सँवारा नहीं

आज तक यूँ किसी ने दुलारा नहीं

क्यों न आऊँ तुम्हारे बुलाने से मैं

इस तरह तो किसी ने पुकारा नहीं।

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हजारों बादलों का दिल हुआ पानी बहुत मचला

हिमालय धूप के आग़ोश में आकर नहीं पिघला

घुला चंदा घुला सूरज घुली सौ रूप की किरणें

मगर इस झील के पानी ने अपना रंग नहीं बदला।

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हर इक बात पर यूँ शिकायत न होती

अगर हमको तुमसे मुहब्बत न होती

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जो हमारे पास है वो बहुत क़ीमती है,

चीजों की क़ीमत पाने से पहले और 

इंसान की क़ीमत खोने के बाद होती है

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जिनके होने का अहसास हो न हो पर,

जिनके न होने का अहसास बहुत होता है…

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कैसे करेगा अब भला सच की बयानी

उसने तो आईने की जुबां ही खरीद ली

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बता देता है साहब ये वक़्त का दरपन

किस द से दोस्त है किस द से दुश्मन

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न जाने क्यों खामोशियों का साज़ हुए फिरते हैं

हम सच बोलते हैं तो दोस्त नाराज़ हुए फिरते हैं

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हमारे साथ रहते हैं हमें फिर आज़माते हैं

बनकर राज़दां आँखो से काजल तक चुराते हैं

चलो अच्छा हुआ वरना हमें कैसे पता चलता

वही जो लोग सस्ते हैं सबक़ महँगे सिखाते हैं

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ख़्वाब ही सही हमसफ़र हो जाए

नींद का अगर अब असर हो जाए

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ज़रूरत है अगर उसको, चला आएगा वो इक दिन

किसी को बे वजह यूँ ही, पुकारा हम नही करते

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मत सोचना इस बात का हिसाब नही है

कि तुम जैसा किसी और का रुआब नही है

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मुहब्बत की हद या वफा देखना है

तुम्हें दिल के टुकड़ों में क्या देखना है

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सहने की हद टूट गयी अब दर्द गुज़ारिश करता है

ये मंज़र हो ख़्वाब बुरा बस ऐसी ख़्वाहिश करता है

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मात देकर अंधेरे को जल्द ही जीत जाएँगे आगे बढ़ेंगे

दीप उम्मीद का इक जलाकर हम लड़ेंगे लड़ेंगे लड़ेंगे

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मै भी रहता हूँ पास------मंदिर-मस्जिद के...

मै भी "यारब" तेरा------पड़ोसी हूँ..

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तुम ही आकर थाम लो ना मुझे,

सब ने छोड़ दिया है मुझे तेरा समझ कर..!!

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