javed akhtar shayari in hindi | जावेद अख्तर शायरी इन हिंदी

javed akhtar shayari in hindi | जावेद अख्तर शायरी इन हिंदी

javed akhtar shayari in hindi | जावेद अख्तर शायरी इन हिंदी

तमन्‍ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ, 
यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ...

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वो ज़माना गुज़र गया कब का, 
था जो दीवाना मर गया कब का, 
ढूँढता था जो इक नई दुनिया, 
लूट के अपने घर गया कब का... 

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छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था, 
अब मैं कोई और हूँ वापस तो आ कर देखिए, 
अक़्ल ये कहती दुनिया मिलती है बाज़ार में, 
दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए... 

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मैं पा सका न कभी इस खलिश से छुटकारा, 
वो मुझ से जीत्त भी सकता था जाने क्यों हारा... 

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इस शाहर मे जीने के अंदाज़ निराले है, 
होटो पे लतीफ़े है आवाज़ मे छाले है... 

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बदल गई है ज़िंदगी, बदल गये हैं लोग भी,
ख़ुलूस का जो था कभी, वो अब सिला नहीं रहा... 

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मैं ख़ुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है, 
जिस का जवाब चाहिए वो क्या सवाल है... 

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सोचो तो बड़ी चीज़ है तहज़ीब बदन की, 
वर्ना ये फ़क़त आग बुझाने के लिए हैं... 

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यह दुनिया भर के झगडे, घर के किस्से, काम की बातें,
बला हर एक टल जाये, अगर तुम मिलने आ जाओ ... 

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घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था, 
क्या मुझ से खो गया है मुझे क्या मलाल है... 

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अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें, 
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं... 

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थोडा गम है सबका किस्सा, 
थोड़ी धुप है सब का हिस्सा... 

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हम तो बचपन में भी अकेले थे, 
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे... 

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Bhulna sikhiye Janab
Ek Din Duniya bhi Vahi Karne Wali Hai

भूलना सीखिए जनाब
1 दिन दुनिया भी वही करने वाली है

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Kaaton ka bhi Ahsaan Ada Kijiye Janab
Kai bar Phoolon Ki Laaj Bachai hogi

कांटो का भी एहसान अदा कीजिए जनाब
कई बार फूलों की लाज बचाई होगी

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Ham bhi kafi Tej the pahle
Vah bhi thi Hoshiyar bahut
Pahle donon Khel rahe the
Lekin ab hai pyar bahut

हम भी काफी तेज थे पहले
वह भी की होशियार बहुत
पहले दोनों खेल रहे थे
लेकिन अब है प्यार बहुत 

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Kyon dare jindagi mein kya hoga
Kuchh Na hoga to tajurba hoga

क्यों डरे कि जिंदगी में क्या होगा
कुछ ना होगा तो तजुर्बा होगा

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Kaha se aaya Kidhar gaya hai
Yeh Kab Se kab tak ka Silsila Hai

कहां से आया किधर गया है
यह कब से कब तक का सिलसिला है

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Kho gyi hai manzile
Mit gaye hai sare raste
Sirf gardishe hi gardishe
Hai ab mere waste

खो गई है मंजिले
मिट गए हैं सारे रास्ते
सिर्फ दी है
हे अब मेरे वास्ते

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Koi shikwa Na koi gam na koi yad
Baithe Baithe bus aankh bhar aai

कोई शिकवा ना कोई गम ना कोई याद
बैठे-बैठे बस आंख भर आई 

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Ye khamoshi jo guftagu ke
Bich thehri hai
Yahi ek baat guftgu mein
Sabse gehri hai

यह खामोशी जो  गुफ्तगू के
बीच ठहरी है
यही एक बात गुफ्तगू में
सबसे गहरी है 

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Agar dusro ke jor par
Udkar dikhaoge
To apne pero se
Udne ka hoonar bhul jaoge

अगर दूसरों के जोर पर
उड़ कर दिखाओगे
अपने पैरों से
उड़ने का हुनर भूल जाओगे 

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Hamko to bas talash
Nae rasto ki hai
Hum hai musafir aise
Jo manzil se aaye hai

हमको तो बस करना
नए रास्तों की है
हम हैं मुसाफिर ऐसे
जो मंजिल से आए हैं 

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Mujhe gum hai ki maine
Jindagi Mein Kuchh Nahin Paya
Yah Gam dil se nikal Jaaye
Agar tum milane aa jao

मुझे गम है कि मैंने
जिंदगी में कुछ नहीं पाया
यह गम दिल से निकल जाए
अगर तुम मिलने आ जाओ

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